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Toggleबच्चों में मिर्गी: कारण, लक्षण और इलाज के बारे में पूरी जानकारी
बच्चे को अचानक झटके आना, कुछ समय के लिए बेहोश होना या कुछ सेकंड तक एकटक देखते रहना माता-पिता के लिए बेहद चिंताजनक हो सकता है। हर दौरा मिर्गी नहीं होता, लेकिन बार-बार होने वाले बिना स्पष्ट कारण के दौरे चिकित्सकीय जांच की मांग करते हैं। बच्चों में मिर्गी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि में असामान्य बदलाव के कारण बार-बार दौरे पड़ सकते हैं। समय पर पहचान और उचित उपचार से कई बच्चों में दौरे को अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
मिर्गी कितने प्रकार की होती है?
मिर्गी को मुख्य रूप से दौरे की शुरुआत के आधार पर अलग-अलग प्रकारों में समझा जाता है। प्रमुख रूप से इसे फोकल (Focal) मिर्गी और जनरलाइज्ड (Generalized) मिर्गी में बांटा जाता है।
फोकल मिर्गी में असामान्य विद्युत गतिविधि मस्तिष्क के किसी एक हिस्से से शुरू होती है, जबकि जनरलाइज्ड दौरे में मस्तिष्क के दोनों हिस्सों की विद्युत गतिविधि प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में दौरे का प्रकार तुरंत स्पष्ट नहीं होता और इसके लिए EEG तथा अन्य जांचों की आवश्यकता पड़ सकती है।
बच्चों में फोकल मिर्गी क्या है?
फोकल मिर्गी में दौरा मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से से शुरू होता है। इसके लक्षण इस बात पर निर्भर कर सकते हैं कि मस्तिष्क का कौन-सा भाग प्रभावित है। बच्चे में हाथ या पैर के किसी हिस्से में झटके, अचानक असामान्य हरकत, अजीब संवेदना, कुछ समय के लिए प्रतिक्रिया न देना या असामान्य व्यवहार दिखाई दे सकता है।
कुछ बच्चों में दौरे के दौरान होश बना रह सकता है, जबकि कुछ में चेतना प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल झटकों को ही मिर्गी का संकेत मानना सही नहीं है।
बच्चे में मिर्गी के लक्षणों को कैसे पहचानें?
बच्चों में मिर्गी के लक्षण हर बच्चे में एक जैसे नहीं होते। संभावित संकेतों में अचानक बेहोशी, शरीर में बार-बार झटके आना, हाथ-पैर अकड़ना, कुछ समय के लिए एकटक देखना, आवाज देने पर प्रतिक्रिया न देना, अचानक गिर जाना या दौरे के बाद कुछ समय तक भ्रमित रहना शामिल हो सकता है।
कुछ दौरे बहुत हल्के होते हैं और माता-पिता उन्हें सामान्य व्यवहार समझ सकते हैं। यदि ऐसी घटना बार-बार दिखाई दे, तो बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ से दिखाना उचित है।
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बच्चे में मिर्गी के लक्षण किस वजह से होते हैं?
दौरे मस्तिष्क में होने वाली असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण उत्पन्न होते हैं। इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ बच्चों में आनुवंशिक या जन्मजात कारण भूमिका निभा सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में जन्म के समय मस्तिष्क को ऑक्सीजन की कमी, सिर में गंभीर चोट, मस्तिष्क संक्रमण, मस्तिष्क की संरचना से जुड़ी समस्या या अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियां कारण बन सकती हैं।
हालांकि, कई बच्चों में विस्तृत जांच के बावजूद निश्चित कारण पता नहीं चल पाता। इसलिए हर बच्चे के मामले का मूल्यांकन अलग तरीके से किया जाना चाहिए।
बच्चों में मिर्गी के दौरे रात के समय ही क्यों होते हैं?
कुछ प्रकार के दौरे नींद के दौरान अधिक दिखाई दे सकते हैं। नींद और जागने के बीच मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि में बदलाव होने के कारण कुछ बच्चों में रात के समय दौरे ट्रिगर हो सकते हैं। नींद की कमी, अनियमित नींद और कुछ अन्य परिस्थितियां भी कुछ बच्चों में दौरे की संभावना बढ़ा सकती हैं।
यदि माता-पिता को रात में बच्चे के शरीर में बार-बार झटके, अचानक अकड़न, असामान्य आवाज या नींद से उठने के बाद भ्रम जैसी घटनाएं दिखाई दें, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है। संभव हो तो घटना का सुरक्षित वीडियो डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकता है।
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क्या मिर्गी बच्चे के मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है?
बच्चों में मिर्गी होने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे का मानसिक विकास निश्चित रूप से प्रभावित होगा। बहुत से बच्चे उचित उपचार के साथ सामान्य रूप से पढ़ाई और दैनिक गतिविधियां कर सकते हैं। हालांकि, बार-बार होने वाले अनियंत्रित दौरे, कुछ मस्तिष्क संबंधी मूल कारण, नींद की समस्या या कुछ मामलों में दवाओं के दुष्प्रभाव सीखने और व्यवहार पर असर डाल सकते हैं।
इसलिए बच्चे की पढ़ाई, भाषा, याददाश्त, व्यवहार और विकास पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। यदि कोई बदलाव दिखाई दे तो उपचार कर रहे डॉक्टर को बताना चाहिए।
बच्चों में मिर्गी के लिए डाइटरी थेरेपी क्या है?
कुछ बच्चों में, खासकर जब दवाओं से दौरे पर्याप्त रूप से नियंत्रित न हों, डॉक्टर केटोजेनिक डाइट जैसी डाइटरी थेरेपी पर विचार कर सकते हैं। इसमें भोजन में वसा की मात्रा अधिक और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा नियंत्रित रखी जाती है। कुछ विशेष प्रकार की मिर्गी में यह उपचार दौरे कम करने में मदद कर सकता है।
यह सामान्य वजन घटाने वाली डाइट नहीं है और इसे बिना विशेषज्ञ की सलाह के शुरू नहीं करना चाहिए। बच्चे की उम्र, पोषण, दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बाल न्यूरोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित डाइटिशियन इसकी निगरानी कर सकते हैं।
मिर्गी का इलाज कैसे किया जाता है?
बच्चों में मिर्गी का उपचार उसके प्रकार, कारण, बच्चे की उम्र, दौरे की आवृत्ति और अन्य स्वास्थ्य कारकों पर निर्भर करता है। कई बच्चों में एंटी-सीजर दवाओं से दौरे नियंत्रित किए जा सकते हैं। दवा की सही मात्रा और अवधि डॉक्टर तय करते हैं। कुछ बच्चों में नियमित फॉलो-अप और EEG जैसी जांचों से उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलती है।
दवा अपने आप बंद करना या खुराक बदलना उचित नहीं है, क्योंकि इससे दौरे दोबारा आने का जोखिम बढ़ सकता है।
मिर्गी के इलाज में न्यूरोसर्जन की क्या भूमिका होती है?
अधिकांश बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन यदि किसी बच्चे में दवाओं के बावजूद बार-बार दौरे आते रहें और जांच से पता चले कि दौरे मस्तिष्क के किसी ऐसे हिस्से से शुरू हो रहे हैं जिसे सुरक्षित रूप से उपचारित किया जा सकता है, तो एपिलेप्सी सर्जरी पर विशेषज्ञ टीम विचार कर सकती है।
न्यूरोसर्जन की भूमिका ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण हो सकती है। डॉ. अमित देवड़ा जैसे न्यूरोसर्जन बच्चे की रिपोर्ट, ब्रेन इमेजिंग और अन्य विशेषज्ञों के मूल्यांकन के आधार पर सर्जिकल विकल्पों पर मार्गदर्शन कर सकते हैं। सर्जरी का निर्णय हमेशा विस्तृत जांच और बहु-विषयक विशेषज्ञ टीम की सलाह के बाद लिया जाता है।
माता-पिता को क्या करना चाहिए?
बच्चों में मिर्गी के संदेह में घबराने के बजाय बच्चे की सुरक्षा सबसे पहले सुनिश्चित करें। दौरे के दौरान बच्चे को सुरक्षित जगह पर लिटाएं, उसके आसपास की कठोर या खतरनाक वस्तुएं हटा दें और उसे जबरदस्ती पकड़कर रोकने की कोशिश न करें। मुंह में कोई वस्तु या उंगली न डालें।
यदि दौरा पहली बार आया है, बहुत लंबे समय तक जारी रहता है, एक के बाद दूसरा दौरा आता है, बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है या दौरे के बाद बच्चा सामान्य स्थिति में नहीं लौटता, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
सही समय पर पहचान, उचित जांच और विशेषज्ञ की निगरानी से बच्चों में मिर्गी को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने की संभावना कई मामलों में अच्छी होती है। माता-पिता का सहयोग, नियमित दवा, पर्याप्त नींद और डॉक्टर के साथ नियमित फॉलो-अप बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।























