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Toggleयुवा लोगों में स्पाइन की समस्या ज़्यादा क्यों हो रही है?
आज के समय में एक चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि युवा लोगों में स्पाइन की समस्या पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा देखने को मिल रही है। जो समस्या पहले 45–50 साल की उम्र में होती थी, वही अब 20–30 साल के युवाओं में भी आम होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी बदलती जीवनशैली है।
सुबह उठते ही हम नाश्ते की टेबल पर बैठ जाते हैं। उसके बाद गाड़ी में बैठकर ऑफिस जाते हैं। ऑफिस पहुँचकर घंटों कंप्यूटर के सामने कुर्सी पर बैठे रहते हैं। फिर शाम को वापस गाड़ी में बैठकर घर आते हैं, जहाँ अक्सर घंटों ट्रैफिक में फँसे रहते हैं। घर आकर भी बैठकर खाना खाते हैं, फिर बैठकर टीवी देखते हैं और अंत में सो जाते हैं।
दिनभर इस तरह लगातार बैठे रहने की आदत हमारी स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) को बहुत ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है। शरीर को जिस मूवमेंट की ज़रूरत होती है, वह हमें मिल ही नहीं पाती।
ज़्यादा देर तक बैठना (स्पाइन) कितना खतरनाक है?
आजकल सोशल मीडिया पर कई लोग कहते हैं कि ज़्यादा देर तक बैठना सिगरेट पीने जितना खतरनाक है, और लोग सिटिंग की वजह से मर रहे हैं।
इस बात को पूरी तरह मापना (Quantify करना) थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि इसका असर व्यक्ति की लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है।

सिगरेट पीने के मामले में आप गिन सकते हैं कि कोई व्यक्ति दिन में कितनी सिगरेट पी रहा है और उसका जोखिम कितना है। लेकिन बैठने के मामले में सिर्फ बैठना ही कारण नहीं होता।
इसमें कई बातें शामिल होती हैं, जैसे:
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व्यक्ति का वज़न कितना है
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वह व्यायाम करता है या नहीं
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उसकी जेनेटिक (वंशानुगत) स्थिति
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और उसकी ओवरऑल लाइफस्टाइल
सिर्फ बैठने से ही समस्या नहीं होती, बल्कि बैठने के साथ गलत आदतें जुड़ जाती हैं, जो नुकसान बढ़ा देती हैं।
Degenerative का मतलब क्या होता है?
Degenerative का मतलब होता है Wear and Tear, यानी समय के साथ होने वाला घिसाव।
जैसे गाड़ी के टायर समय के साथ घिस जाते हैं और उन्हें बदलना पड़ता है, उसी तरह हमारी स्पाइन भी लगातार दबाव और गलत आदतों की वजह से धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इसे ही Degenerative Spine Problem कहा जाता है।
इस समस्या में स्पाइन की सामान्य संरचना और उसका काम करने की क्षमता समय के साथ कम होने लगती है। यह समस्या आमतौर पर उम्र बढ़ने से होती है, लेकिन आजकल युवा लोगों में स्पाइन की समस्या का एक बड़ा कारण यही डिजेनेरेटिव बदलाव हैं।
Degenerative Spine Problem क्या है?
डिजेनेरेटिव स्पाइन समस्या वह स्थिति है जिसमें समय के साथ स्पाइन की सामान्य बनावट (Structure) और उसका काम करने की क्षमता (Function) धीरे-धीरे कम होने लगती है।
यह समस्या आमतौर पर:
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बढ़ती उम्र के कारण होती है
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लेकिन कभी-कभी यह
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ट्यूमर
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इंफेक्शन
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या अर्थराइटिस (जोड़ों की बीमारी)
की वजह से भी हो सकती है
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इस स्थिति में स्पाइन कमज़ोर होने लगती है, दर्द शुरू हो सकता है और रोज़मर्रा के कामों में परेशानी आने लगती है।
युवा लोगों में स्पाइन की समस्या के मुख्य कारण
- लंबे समय तक बैठकर काम करना
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गलत पॉश्चर में बैठना और सोना
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शारीरिक गतिविधि की कमी
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मोबाइल और लैपटॉप का ज़्यादा इस्तेमाल
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मोटापा और अनहेल्दी डाइट
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नियमित व्यायाम न करना
ये सभी कारण मिलकर कम उम्र में ही स्पाइन को नुकसान पहुँचाने लगते हैं।
स्पाइन से जुड़े सवाल और उनके जवाब
क्या युवाओं में स्पाइन की समस्या ठीक हो सकती है?
हाँ, अगर समय रहते सही इलाज, फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज़ और लाइफस्टाइल में बदलाव किया जाए, तो स्पाइन की अधिकतर समस्याएँ कंट्रोल या ठीक की जा सकती हैं।
स्पाइन दर्द के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
पीठ या गर्दन में लगातार दर्द, जकड़न, हाथ-पैर में झनझनाहट, बैठने या उठने में परेशानी – ये शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
क्या सिर्फ बैठने से ही स्पाइन खराब होती है?
नहीं, सिर्फ बैठना ही कारण नहीं है। गलत पॉश्चर, एक्सरसाइज़ की कमी, मोटापा और तनाव भी युवा लोगों में स्पाइन की समस्या को बढ़ाते हैं।
स्पाइन को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
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रोज़ाना हल्का व्यायाम करें
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सही पॉश्चर में बैठें
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लंबे समय तक एक ही जगह न बैठें
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वजन नियंत्रित रखें
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समय-समय पर डॉक्टर से सलाह लें
निष्कर्ष
डॉ. अमित देवड़ा न्यूरोसर्जन इन इंदौर का कहना की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हम अपने शरीर की सबसे ज़रूरी चीज़ – स्पाइन – को भूलते जा रहे हैं। गलत आदतें, बैठने वाली जीवनशैली और एक्सरसाइज़ की कमी की वजह से युवा लोगों में स्पाइन की समस्या लगातार बढ़ रही है।
अगर आज ही हम अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो भविष्य में बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है। याद रखें, स्वस्थ स्पाइन ही एक एक्टिव और दर्द-मुक्त जीवन की कुंजी है।





















